ब्लॉकड इश्क़

महिमा, नाम के अनुरूप, सुंदर, सुशील व मानवीय मूल्यों से सुसज्जित, सुदृढ़ व्यक्तितव की धनी थी। देहरादून की डिफेंस अकेडमी में जब वह कैडेट के तौर पर आफिसर टैरेनिंग का हिस्सा बनी तो सभी युवा कैडेट्स की नज़रों में उसने एक अलग जगह बना ली थी। शशांक भी इस एकेडमी की शान था। गठीला बदन, छ: फुट का कद , घुंघराले बाल, सुरमयी नयन व उसकी शालीनता किसी को भी सम्मोहित करने के लिए काफी थी। चार साल की सख्त आफिसर टैरेनिंग के साथ साथ हम सब साथी महिमा और शंशाक के बीच अंकुरित होते इश्क़ के साक्षी रह रहे थे। समय के साथ इस प्रेम में रची बची सुगंध दोनों के परिवार वालों तक भी पहुंची।

पासिंग आऊट परेड के बाद शंशाक ने महिमा को अपने माता पिता से मिलवाया। हम सब साथी अलग अलग जगहों पर पोस्टिंग मिलने के बाद अपनी रेजीमेंट का हिस्सा बन चुके थे। मातृभूमि की सुरक्षा अब हमारे नाजुक कंधों पर थी। कारगिल युद्ध छिड़ चुका था। शशांक भी इस युद्ध में अग्रिम पंक्ति में तैनात था। दुश्मन देश की तरफ़ से बम वर्षा लगातार जारी थी। शंशाक के नेतृत्व में बीस जवानों की टुकड़ी पहाड़ी के पीछे छुपे दुश्मन सैनिकों पर टूट पड़ी। दोनों ओर से भयानक गोलाबारी चल रही थी। दुश्मन के छक्के छुड़ा कर टुकड़ी लौट रही थी। शंशाक ने पहले अपने साथियों को कवर फायर देते हुए सुरक्षित स्थान पर पंहुचा दिया। सभी साथी बेस कैंप पहुंच चुके थे और अपने कमांडर शंशाक का इंतजार कर रहे थे। काफी वक्त बीतने के बाद उच्च कंमाडर को सूचना दी गई। दो दिन तक शशांक की कोई खोज़ खबर नहीं थी।

खैर, एक सप्ताह बाद आंतकवादी के चुंगुल से बच कर शशांक भी अपनी यूनिट में पहुंच चुका था। महिमा को ग्राउंड की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शंशाक के वापिस लौटने का समाचार पाकर उसने राहत की सांस ली थी। एक साल तक शंशाक और महिमा का इश्क़ परवान चढ़ता रहा। महिमा ने दिल से उसे जीवनसाथी के रूप में अपने हृदय में बसा लिया था। अपने प्रेम के प्रति वह आश्वस्त थी। रंगीन सपने उसके आनेवाले कल में अनेकों रंग भर रहे थे। लड़कियां वैसे भी अपनी रिलेशनशिप को लेकर बहुत कमिटेड होती हैं। शशांक एक महीने की छुट्टी पर घर गया था। जब लौटकर आया तो उसकी जीवन संगनी उसके साथ थी जिसके चेहरे से नूर टपक रहा था। तहकीकात की गई तो पता चला नूर, शशांक के कम्पनी कमांडर बिरगेडियर सुबोध की बेटी थी और शशांक ने इस रिश्ते को इसलिए नहीं ठुकराया, क्योंकि वह जल्द ही प्रमोशन चाहता था और बिरगेडियर की छत्रछाया में अपना सुरक्षित भविष्य देख रहा था।

उधर महिमा एक साधारण परिवार से आती थी। महिमा को शंशाक की शादी के बारे में पता चला चुका था। उसका इश्क़ एक उच्च आंकक्षा रखने वाले शंशाक के स्वार्थ की भेंट चढ़ चुका था। अंतस पर लगी इस चोट ने महिमा को गहरे अवसाद में ढकेल दिया। परंतु परिवार और दोस्तों के सबंल से वह जल्द से ही बाहर आ गई थी। अब अपने माता पिता की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए उसने भी अपनी नयी जिंदगी शुरू करते हुए मेज़र शेखर से शादी कर ली थी। बहुत सालों से महिमा और शंशाक सोशल मीडिया से संपर्क में थे। लेकिन शशांक द्वारा दिए धोखे से आहत होकर, अब उसने शंशाक को ब्लाक कर दिया था क्योंकि वह अपने नये जीवन में उसकी छाया को भी प्रवेश नहीं देना चाहती थी।

जो व्यक्ति किसी भी रिश्ते को लेकर गंम्भीर होते हैं उन्हें चोट भी उतनी ही गहरी लगती है। जिस प्रेम को क्षण क्षण महिमा ने सिंचित किया था उसकी इस तरह की बेवफाई ने उसके हृदय में आक्रोश भर दिया था। रोम रोम में व्यापत इश्क़ की खूशबू अब महिमा के लिए जहर का काम कर रही थी। जो शंशाक अपने प्रेम की कसमें खाते हुए कहता था कि, ” दिल चीर कर देख लो। इस दिल में तुम्हारा ही नाम लिखा है”। जाने उसकी क्या मजबूरी थी कि अपने प्रेम पर दाग लगा गया था। महिमा ने वे सब कैसट भी अग्नि की भेंट चढ़ा दिए जिसमें शशांक के द्वारा गाए नगमें थे, जो महिमा के प्रति समर्पित थे। अब उन गानों को सुनती थी तो हृदय में शूल से चुभते थे। शंशाक और महिमा के बीच जिन पत्रों का आदान प्रदान हुआ था उनको भी महिमा ने अग्नि की भेंट चढ़ा दिया था। अपने इश्क़ को इस तरह अग्नि के हवाले करते महिमा के दिल के आंसू सैलाब बन उमड़े थे। निर्णय तो लेना ही था क्योंकि जख्मों को साथ लेकर जीने से वर्तमान और भविष्य दोनों पर गहरा असर पड़ता है।

महिमा अपने गृहस्थ जीवन में खुश थी। मेज़र शेखर एक सुलझे हुए इंसान थे। महिमा ने पति से विवाह से पहले की सभी बात सांझा कर ली थी क्योंकि दोनों पति पत्नी जानते थे कि आधुनिक समय में सभी के कोई न कोई प्रेम प्रसंग होते हैं और बेहतर है उन यादों को जहन से एकबार निकाल कर नयी जिंदगी की शुरुआत की जाए तो पति पत्नी का रिश्ता विश्वास की मजबूत नींव पर सवार होकर  जिंदगी में सुवास भर देता है। महिमा शेखर जैसे पति को जीवनसाथी के रूप में पाकर गौरवान्वित महसूस कर रही थी और उसकी बाहों में महफूज़ भी।

✍️©® “जोया” 08/02/2019

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