मन का हिरण

अधूरी प्रेम कहानी की टीस जब हृदय में उठती है तो मन का हिरण कुलांचे भरते हुए यौवन की दहलीज़ पर पहुंच जाता है और अतीत के झरोखों से आनेवाली खुशबूएं दिल के आंगन को महकाने को आतुर हो जाती है।

ऐसी ही एक कहानी है आशिफ़ और सुरभी की जो एक साथ मल्टीनेशनल कंपनी में ऊंचे पदों पर विराजमान हैं। आई आई एम अहमदाबाद से एम बी ए की डिग्री हासिल करने के पश्चात दोनों ने तय किया था कि अपने परिवारजनो की सहमति से अपने इश्क पर मोहर लगा कर गृहस्थ जीवन में कदम रखेंगे।

एम बी ए के दौरान आसिफ़ और सुरभी एक दूसरे के करीब उस वक्त आए जब दोनों एक प्रोजेक्ट पर साथ साथ काम कर रहे थे। आशिफ़ का व्यक्तित्व एक चुम्बकीय आकर्षण लिए था। उसकी बौद्धिक क्षमता व सहपाठी लड़कियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की वज़ह से सुरभी के दिल में उसने एक विशेष स्थान बना लिया था। उधर आशिफ़, सुरभी की वाकपटुता, सकारात्मक ऊर्जा व जिंदादिली से प्रभावित था। प्रोजेक्ट पर काम करते हुए एक दूसरे को समझने का अवसर भी मिला और कोर्स के आखिरी सैमस्टर तक आते आते दोनों ने जीवनसाथी बनना तय कर लिया था और हम सब साथियों को इज़हार पार्टी भी थी।हम सब खुश थे कि उनका प्यार परवान चढ़ रहा था।

सभी साथी अच्छे पदों पर नियुक्त हो गए थे। आशिफ़ और सुरभी भी मल्टीनेशनल कंपनी में प्लेसमेंट पा चुके थे। एक महीने बाद दोनों को ज्वाइन करना था। घर जाकर दोनों ने अपने अपने माता पिता को एक दूसरे के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि, “ हम जीवनसाथी बनकर अपने प्रेम पर मोहर लगाना चाहते हैं। आपका आशीर्वाद चाहिए“। लेकिन इश्क़ की डगर बहुत कंटीली होती है। वे खुशनसीब होते हैं जिन्हें यह मुकाम हासिल हो जाता है। नहीं तो जीवन अनुभव यही कहता है कि इस राह में बाधाएं बहुत हैं। ऊंची ऊंची दीवारें हैं जिनको लांघना आसान नहीं होता है। आशिफ़ और सुरभी के केस में तो महज़ब की इतनी ऊंची दीवार खड़ी हो गई कि अति आधुनिक कहे जाने वाले परिवारों में जात पात, धर्म, बिरादरी व समाज की भूलभूलैया में इश्क़ और इंसानियत को रास्ता नज़र नहीं आया और दोनों को परिवार की साख के लिए मोहब्बत को अतीत की कब्र में दफनाना पड़ा।

कुछ साल बीते और आशिफ़ और सुरभी की शादी उनके परिवारों के रितिवाज़ के मुताबिक हो गई। मैं चूंकि दोनों की ही दोस्त थी, उनकी शादियों में सम्मलित हुई थी। खुश लग रहे थे दोनों लेकिन उदासी की एक परत फिर भी मुझे दिखाई दे गई थी। जिंदगी में आप ठहर नहीं सकते। उसके कदम के साथ कदम मिलाना होता है नहीं तो उलझनों के थागे कभी नहीं सुलझते , उन्हें सुलझाना होता है धैर्यशीलता के साथ ,फर्ज़ को ध्यान में रखते हुए। जो लोग सुलझाने की कोशिश नहीं करते वे भावनाओं के मकडज़ाल में उलझ कर रह जाते हैं। आशिफ़ और सुरभी ने अपने मन के हिरण को निंयत्रण में कर लिया था और अपनी शैक्षणिक योग्यता के दम पर आज़ बीस बर्ष बाद इतनी आर्थिक संपन्नता हासिल कर ली है कि हुनरमंद लेकिन आर्थिक रूप से कमज़ोर युवाओं के लिए मिलकर एक कालेज़ की स्थापना की है जहां विभिन्न कौशल के आयामों की शिक्षा दी जाती है। एम बी ए प्रवेश परीक्षा का भी कोचिंग संस्थान खोला है जहां विद्धार्थीयों को नि:शुल्क तैयारी करवाई जाती है। उन्हें इस बात की तसल्ली है कि वे एक विकास कार्य में योगदान दे रहे हैं। देश के भविष्य को उज्जवल बनाने में उठा उनका ये एक छोटा सा कदम आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा।

फिर भी कभी मैं उनका मन टटोलती हूं तो आशिफ़ और सुरभी की आंखे नम हो जाती हैं। इश्क़ का तार आत्मिक रुप से अभी भी जुड़ा है और यादें सावन की बदली की तरहं बरसने लगती हैं।

✍️©®” जोया” 11/12/2019

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