नियति

एक दूसरे से मिलने की कसमें खाकर रोहित और निशा कालेज खत्म करके अपने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अलग हो जाते हैं। रोहित को विदेश की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रवेश मिल गया था और निशा भारत मे ही प्रबंधन की छात्रा बन गई। दोनों का प्यार कालेज मे सभी के लिए मिसाल बन गया था और सभी आश्चर्यचकित रहते थे कि कैसे रोहित निशा पर जान छिड़कता है। निशा खुश थी और गर्वित भी रहती थी कि कोर्स खत्म होने पर दोनों जीवनसाथी बनकर इश्क के सागर में डुबकियां लगाएंगे। समय पंख लगाकर उड़ रहा था।…आज निशा बहुत खुश थी कि रोहित देश लौट रहा है और उसने कितनी ही योजनाएं बनायी थी कि कैसे एक साथ अपने आगामी जीवन की रुपरेखा तैयार करेगें।…
निशा को सुंदर सी साड़ी पहने मां ने देखा तो इस श्रृंगार का कारण पूछा तो निशा ने कहा अभी वह एयरपोर्ट अपने मित्र को लेने जा रही है और वापिस आकर सब बता देगी। मां तो बेटी के इस सुंदर रुप से ही बहुत खुश थी । चूंकि निशा का कोर्स भी खत्म हो गया था तो मां भी उसके लिए रिश्ते ढूंढ रही थी। निशा के पिता तो बहुत पहले ही एक दुर्घटना में चल बसे थे। मां और मामा पर ही अब निशा की शादी की जिम्मेदारी थी। मां ने कितने ही गहने और कीमती चीजें उसकी शादी में देने के लिए तैयार कर रखी थी।…

प्लेन का समय हो गया था और निशा सुंदर फूलों का गुच्छा लेकर रोहित को रिसीव करने लाउंज मे बेसबरी से इंतजार कर रही थी। उसकी दिल की धड़कनें मिलन की उत्सकुता में बढ़ती जा रही थी। एक एक करके यात्री लाउंज की ओर बढ़ रहे थे। निशा की निगाहें रोहित को तलाश रही थीं। थोड़ी देर बाद रोहित हाथ हिलाता हुआ लाउंज की तरफ़ आ रहा था। रोहित को रिसिव करने के लिए उसके परिवार के सदस्य भी आए थे। रोहित के बग़ल में एक सुंदर युवती भी एक छोटे बच्चे को गोद मे लेकर चल रही थी। निशा ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि रोहित से उसकी हर सप्ताह बात होती थी और वही प्यार की कसमें दोहरायी जाती थी। निशा देख रही थी कि रोहित उसकी तरफ़ हाथ हिलाते हुए अपने परिवार की ओर बढ़ जाता है और उस लड़की को इशारा करता है माता पिता के पांव छूने के लिए। वे भी उसे गले से लगा लेते हैं और अपने पोते को गोद मे लेकर एयरपोर्ट से बाहर खड़ी अपनी गाड़ी में बैठ जाते हैं। रोहित जल्दी से निशा के पास आता है और बताता है कि कैसे माता पिताजी की मर्जी के सामने वह झुक गया था। और उन्हें खुश करने
हेतू उसने ये शादी की है.. और कि अब वे अब अच्छे दोस्त बनकर रहेंगे।..
अब बारी निशा की थी। उसने आव देखा न ताव और एक झन्नाटेदार थपड़ रोहित के गालों पर जड़ कर सीधा अपनी गाड़ी में बैठकर वापिस लौट आती है। उसकी दुनिया लुट चुकी थी… मां ने देखा कि निशा बहुत उदास रहने लगी है। बेटी के दर्द को वह अच्छे से समझ सकती थी। मां से ज्यादा कौन अपने बच्चे को जान सकता है। एक नारी भी यदि नारी की व्यथा न समझ पाए तो नारी जीवन धिक्कार है। मां ने निशा को इस दुख से उबरने मे पूरा सहयोग दिया और उसे आगे बढ़कर जीवन को नये आयाम देने के लि प्रेरित किया। निशा ने अब ठान लिया था कि प्रबंधन के क्षेत्र में आगे बढ़कर जीवन की नयी इबारत लिखनी है।…समय अब तेज़ गति से दौड़ रहा था। निशा अपनी कम्पनी की M.D. बन चुकी थी और कार्पोरेट की दुनिया में एक विशिष्ट पहचान बना चुकी थी।… दस साल बाद एक बार फिर रोहित से आमना सामना होता है। लेकिन इस बार निशा उस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुई थी और रोहित को उसके उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित करने के लिए आमंत्रित किया गया था। दोनों एक क्षण के लिए ठिठक जातें हैं। जलपान के दौरान निशा को मालूम हुआ कि रोहित की पत्नी उसे छोड़कर वापिस विदेश जा चुकी है।…

निशा ने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय ले लिया था। कुछ दिन बाद दरवाज़े पर घंटी बजती है और सामने रोहित को पाती है। कुछ क्षण के लिए वह अनिश्चितता की झिझक में खड़ी रहती है। रोहित के कहने पर कि अन्दर आने को नही कहोगी, तब उसकी तंद्रा टूटती है। टेबल पर चाय परोस दी गई थी… दोनों चुप्पी साधे हुए चाय की घूंट भर रहे थे। फिर रोहित ने ही बात शुरू करते हुए प्रस्ताव रखा कि वह उसे जीवन साथी बनाना चाहता है। लेकिन निशा के लिए जीवन के मायने बदल चुके थे। उसने एक संस्था खोल रखी थी जहां वह जिन्दगी में हताश लड़कियों की हर प्रकार से मदद करती थी और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनकी योग्यता अनुसार कार्य क्षेत्रों में स्थापित करने का काम करती थी। वह इन सब की मार्गदर्शक बन चुकी थी और “दीदी” के रूप में सभी उसे प्यार करती थी।…

निशा ने बड़ी विनम्रता के साथ रोहित का प्रस्ताव ठुकरा दिया। पुराने समय की यादें अभी ताज़ा थी और वह अपने जख्मों के उपर आयी परत को हटाना नहीं चाहती थी। इन scars ने उसे एक बल प्रदान किया था । सचे मन से प्यार करने वाले दुबारा कोई मौका नहीं देते। निशा और रोहित की राहें बहुत पहले अलग हो चुकी थी। नियति ने उन्हें दुबारा भी मिलाया लेकिन निशा का फलसफा स्पष्ट था। उसे प्यार में एकबार धोखा हो चुका था। दूसरा अवसर उसके शब्दकोश मे नहीं था। निशा ने बड़ी दृढतापूर्वक रोहित को बता दिया कि अब कभी उसे उसकी मौत की खबर भी पता लगे तो झूठे आंसू बहाने के लिए भी दो शब्द बोलने का हक नही है…।

✍️©®” जोया” 15/12/2018

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