Monthly Archives: November 2018

दीप

चिरागों ने अंधेरे को ललकारा
जीवट के आगे फिर कोई हारा।

दुख के बादलों ने भी किया किनारा
टूटते सपनों को फिर से मिल गया सहारा।

एक दीप जैसी हमारी जीवन गाथा
जलकर ही रोशन होगा मानव का माथा।

एक दीप ने दे दी चुनौती
अंधेरे से भरी रात बन गई मनौती।

कर्मक्षेत्र हो कितना भी छोटा
सहजता से जियो जीवन उतार मुखौटा।

दीप से दीप जल बनती दीपमाला
मानव मानव से जुड़ बना सकते भव्य कर्मशाला।

दीप समान करो रोशन किसी की डगर
मिट्टी से सब पुतले, वहीं जाना एक दिन मगर।

माना दीप तले अंधेरा है
लेकिन होता वहीं से सवेरा है।

दीप समान हैं हम सब छोटे छोटे पुंज
छोटे कदमों से ही तो रोशन होता कुंज।

फूलों से जैसे बागों में बहार है
खिलकर जीना भी तो मानव संस्कार है।

आवश्यक नहीं, करें फतेह पर्वत की चोटी
जीवन सफल वही जो बांटे खुशियां छोटी छोटी।

मानव स्वयं एक प्रकाश पुंज
घिरा लेकिन मोह माया के संग।

नेक कमाई की है दरकार
भ्रष्ट कमाई से कभी न हुआ सुधार।

दीपमाला देती सुंदर संदेश
अमावस की रात सा रोशन हो हर परिवेश।

दीपावली की हार्दिक बधाई व ढेर सारी शुभकामनाएं।
आप सभी का जीवन मंगलमय हो। खूब रोशनी आपके जीवन को प्रकाशित करती रहे।

✍️©” जोया” 04/10/2018

Advertisements