रीत गए

बीती सदी सा तुम रीत गए
भुलाई तुमने प्रीत
बन गए किसी के मीत
मेरे लिए अब तुम बीत गए।

दिल अपना प्रीत पराई
देखो कैसी बदली छाई
आंखे मेरी भर आयी
छलिया तूने कैसी प्रीत निभाई?

प्रीत कैसे बनी यूं हरजाई
आहों की कैसी बेला आयी
तुम्हें याद मेरी ना आई
विरह अग्नि भी शरमाई।

हमजोली मेरे तुम रीत गए
बन गए किसी के मीत
भूले साथ गुनगुनाए गीत
मेरे लिए अब तुम बीत गए।

माथे पर अंकित वो चुम्बन
दिल की बढ़ी जब धड़कन
रोम रोम में हुआ संपन्दन
कण कण में हुई थी थिरकन।

बरसे बादल सा तुम रीत गए
निभाई ना तुमने प्रीत
बन गए किसी के मीत
मेरे लिए तुम अब बीत गए।

सूखे पोखर सा तुम रीत गए
स्वप्न सुनहरे पर कठोर पहरे
होते जख्म दिन रात गहरे
प्रीत का झंडा अब ना फहरे।

शापित कूएं सा तुम रीत गए
झूठलाई तुमने प्रीत
बन गए किसी के मीत
मेरे लिए अब तुम बीत गए।

पत्र में दबा वो गुलाब का फूल
फांक रहा अब गर्दिश की धूल
क्या प्रीत बनी मेरी भूल
चुभते हैं हृदय मे कांटे और शूल।

परंम्पराओ के बंधन तोड़
संकीर्णता के दायरे छोड़
कसमें मिलकर खाई
फिर क्यों हुई प्रीत पराई?

तपते मरूस्थल सा तुम रीत गए
टूटी बंधन की डोर
छा गया अंधेरा यौवन के भोर
मेरे लिए तुम अब बीत गए।

सूखे झरने सा तुम रीत गए
उड़ गया पंछी चकोर
चुग कर जीवन का पोर पोर
नहीं मचाया प्रीत ने शोर।

मिलन की बेला का सतरंगी धनुष
प्रेम रंगों से सज़ाया दिल फानूस
संग गाए गीत बने नासूर
दिल वीणा हुई काफूर।

बरसाती नदी सा तुम रीत गए
सुर सुंदरी के बने तुम मीत
आंसू बहाए मेरी प्रीत
मेरे लिए तुम अब बीत गए।

ये कैसी निभाई तुमनें प्रीत
बागों में कोयल जब कूकेगी
गाएगी तेरी बेवफाई का तराना
प्रेमी युगल ना लिखेंगे फिर कोई फ़साना।

✍️©®जोया”12/10/2018

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